क्या कहता है आयुर्वेद गाय और भैंस के दूध के बारे में

आयुर्वेद में दूध का विस्तृत रूप से वर्णन किया गया है आयुर्वेद में वर्णित दूध का गुण बताने से पहले हम आज हमारे देश में दूध की सप्लाई की स्थिति क्या है वह जान लेते हैं.

हमारे देश में दूध के मुख्यता दो स्रोत है गाय और भैंस का दूध. बकरी का दूध बहुत कम घरेलू स्तर पर प्रयोग होता है. आज जो दूध हम प्रयोग करते हैं, वह बड़ी बड़ी कंपनियों द्वारा प्लास्टिक की बोतलों या थैलियों में हमें मिलता है. यह दूध डेरी कंपनियों द्वारा बनाए गए केंद्रों पर गांव में एकत्र किया जाता है, और इसमें सभी प्रकार का दूध होता है, चाहे वह गाय का हो या भैंस का. इसका मूल्यांकन दूध में वसा की मात्रा के आधार पर किया जाता है फिर इसे शीत केंद्रों पर लाया जाता है.

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मिल्क प्रोसेसिंग के दो चरण होते हैं. पहला है  मानकीकरण और दूसरा है पाश्चरायजेशन. मानकीकरण में दूध की संरचना एक सी रखने के लिए क्रीम मिलाई जाती है या निकाली जाती है.पाश्चरायजेशन में दूध को उच्च ताप पर गर्म करके शीघ्रता से ठंडा किया जाता है, जिससे उस में उपस्थित सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं और दूध की जीवन बढ़ जाती है.

टोंड दूध क्या है
यह एक पुनरमिश्रित उत्पाद है जिसमें अन्य ठोस पदार्थों की मात्रा 8.5% रखते हुए वसा की मात्रा को पानी मिलाकर कम किया जाता है. टोंड दूध में वसा की मात्रा सामान्यतया 1.5 से 4.5% होता है. फिर इसमें वसा रहित मिल्क पाउडर मिलाया जाता है ताकि ठोस पदार्थ की मात्रा 8.5% हो सके.

आयुर्वेद के अनुसार दूध के प्रकार और उसके गुण
आयुर्वेद में दूध की बहुत बड़ाई की गई है. बाल्यावस्था में पहले दो-तीन वर्ष तक दूध जीवन का मुख्य आधार है. संसार में दूध के समान कोई अन्य कोई द्रव्य नहीं है. जन्म से मृत्यु पर्यंत किसी भी दशा में दूध की मनाही नहीं है. शरीरवर्धन के लिए जितने भी कारक आवश्यक हैं. वह सब दूध में मौजूद हैं, इसीलिए दूध को पूर्ण आहार कहा गया है. सामान्यतया दूध मधुर चिकना ओज एवं रस आदि धातुओं को बढ़ाने वाला, वात पित्त कम करने वाला, वीर्य को बढ़ाने वाला, कफकारक, भारी और शीतल होता है.

गाय का दूध

गाय का दूध जीवनी शक्ति को देने वाला तथा रसायन के गुण धर्म से युक्त होता है. यह मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करता है, बलकारक है, थकावट को दूर करता है. श्वास के रोग, प्यास का अधिक लगना, अधिक भूख लगना आदि विकारों को दूर करता है. रक्तपित्त नाशक, मधुर, शीत गुणों से युक्त होता है. गाय का दूध भैंस की दूध की तुलना में अधिक सुपाच्य तथा स्वास्थ्य के लिए ज्यादा लाभदायक है.

भैंस का दूध
भैंस का दूध मधुर, पाचक अग्नि को कम करने वाला तथा गाय के दूध की अपेक्षा अधिक स्निग्ध तथा भारी होता है. जिन्हें नींद ना आती हो उनके लिए भैंस का दूध हितकर होता है. यह गाय के दूध की अपेक्षा अधिक भारी तथा शीतल होता है.

बकरी का दूध
बकरी का दूध गाय के ही दूध के समान गुणों वाला होता है, किंतु बकरी थोड़ा जल पीती है. इधर-उधर दौड़ना उसका गुण होता है. कटु तथा तिक्त रस युक्त पत्तों को प्रायः खाती है. जिससे उसका दूध हल्का होता है. बकरी का दूध बुखार, श्वास के रोग, रक्तपित्त रोगों को नष्ट करता है. यह क्षय(TB) रोगियों के लिए हितकारक एवं भूख को बढ़ाने वाला, पचने में हल्का, अतिसार में दस्त को बांधने वाला होता है.

धारोष्ण दूध यानी सामने दुहा दूध पीना सेहत के लिए अमृत के समान है।किंतु इस प्रकार के दूध में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, क्योंकि बहुत देर से निकाल कर रखा हुआ दूध विष के समान हो जाता है. इसलिए दूध को उबाल कर ही पीना चाहिए.

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