ध्यान की एक सरल एवं अत्यंत प्रभावशाली विधि

मानव मस्तिष्क पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली मशीन है जो बिना आराम के २४ घंटे जीवनभर काम करता है । वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पता चलता है, यदि आप योगी नहीं हैं, तो लगभग 60000 विचार हर दिन आते हैं। क्या होगा, अगर हम इन विचारों को जितना संभव हो सके कम कर सके? तो निश्चित… Read more ध्यान की एक सरल एवं अत्यंत प्रभावशाली विधि

जन्‍मभूमि

सुरसरि सी सरि है कहाँ मेरु सुमेर समान। जन्मभूमि सी भू नहीं भूमण्डल में आन।। प्रतिदिन पूजें भाव से चढ़ा भक्ति के फूल। नहीं जन्म भर हम सके जन्मभूमि को भूल।। पग सेवा है जननि की जनजीवन का सार। मिले राजपद भी रहे जन्मभूमि रज प्यार।। आजीवन उसको गिनें सकल अवनि सिंह मौर। जन्मभूमि जल… Read more जन्‍मभूमि

मीठी बोली

बस में जिससे हो जाते हैं प्राणी सारे। जन जिससे बन जाते हैं आँखों के तारे। पत्थर को पिघलाकर मोम बनानेवाली मुख खोलो तो मीठी बोली बोलो प्यारे।। रगड़ो, झगड़ो का कडुवापन खोनेवाली। जी में लगी हुई काई को धानेवाली। सदा जोड़ देनेवाली जो टूटा नाता मीठी बोली प्यार बीज है बोनेवाली।। काँटों में भी… Read more मीठी बोली

एक बूँद

ज्यों निकल कर बादलों की गोद से थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी सोचने फिर-फिर यही जी में लगी, आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों कढ़ी? देव!! मेरे भाग्य में क्या है बदा, मैं बचूँगी या मिलूँगी धूल में? या जलूँगी फिर अंगारे पर किसी, चू पडूँगी या कमल के फूल में? बह गयी… Read more एक बूँद

एक तिनका

मैं घमण्डों में भरा ऐंठा हुआ । एक दिन जब था मुण्डेरे पर खड़ा । आ अचानक दूर से उड़ता हुआ । एक तिनका आँख में मेरी पड़ा ।। मैं झिझक उठा, हुआ बेचैन-सा । लाल होकर आँख भी दुखने लगी । मूँठ देने लोग कपड़े की लगे । ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी ।।… Read more एक तिनका

बचपन की सबसे प्यारी कविता

उठो लाल अब आँखे खोलो पानी लाई हूँ मुँह धो लो बीती रात कमल दल फूले उनके ऊपर भंवरे डोले चिड़िया चहक उठी पेड़ पर बहने लगी हवा अति सुंदर नभ में न्यारी लाली छाई धरती ने प्यारी छवि पाई भोर हुआ सूरज उग आया जल में पड़ी सुनहरी छाया ऐसा सुंदर समय न खोओ… Read more बचपन की सबसे प्यारी कविता

इतने ऊँचे उठो कि जितना

देखो इस सारी दुनिया को एक दृष्टि से सिंचित करो धरा, समता की भाव वृष्टि से जाति भेद की, धर्म-वेश की काले गोरे रंग-द्वेष की ज्वालाओं से जलते जग में इतने शीतल बहो कि जितना मलय पवन है॥ नये हाथ से, वर्तमान का रूप सँवारो नयी तूलिका से चित्रों के रंग उभारो नये राग को… Read more इतने ऊँचे उठो कि जितना

शक्ति और क्षमा

क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल सबका लिया सहारा पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे कहो, कहाँ, कब हारा? क्षमाशील हो रिपु-समक्ष तुम हुये विनत जितना ही दुष्ट कौरवों ने तुमको कायर समझा उतना ही। अत्याचार सहन करने का कुफल यही होता है पौरुष का आतंक मनुज कोमल होकर खोता है। क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके… Read more शक्ति और क्षमा

मंत्र : मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित एक बहुत अच्छी कहानी

संध्या का समय था। डाक्टर चड्ढा गोल्फ खेलने के लिए तैयार हो रहे थे। मोटर द्वार के सामने खड़ी थी कि दो कहार एक डोली लिये आते दिखायी दिये। डोली के पीछे एक बूढ़ा लाठी टेकता चला आता था। डोली औषाधालय के सामने आकर रूक गयी। बूढ़े ने धीरे-धीरे आकर पर पड़ी हुई चिक से… Read more मंत्र : मुंशी प्रेमचन्द द्वारा लिखित एक बहुत अच्छी कहानी

नर हो, न निराश करो मन को

कुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रह कर कुछ नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो कुछ तो उपयुक्त करो तन को नर हो, न निराश करो मन को। संभलो कि सुयोग न जाय चला कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला समझो जग को न निरा सपना… Read more नर हो, न निराश करो मन को